Friday, August 19, 2011

अन्ना टीम खुद को लोकपाल के दायरे में लाने से क्यों भाग रही है?

रामलीला मैदान में अभी-अभी खत्म हुई प्रेस कांफ्रेंस में अरविन्द केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने साफ़ और स्पष्ट जवाब देते हुए लोकपाल बिल के दायरे में NGO को भी शामिल किये जाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. विशेषकर जो NGO सरकार से पैसा नहीं लेते हैं उनको किसी भी कीमत में शामिल नहीं करने का एलान भी किया. ग्राम प्रधान से लेकर देश के प्रधान तक सभी को लोकपाल बिल के दायरे में लाने की जबरदस्ती और जिद्द पर अड़ी अन्ना टीम NGO को इस दायरे में लाने के खिलाफ शायद इसलिए है, क्योंकि अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया,किरण बेदी, संदीप पाण्डेय ,अखिल गोगोई और खुद अन्ना हजारे भी केवल NGO ही चलाते हैं. अन्ना के सबसे ज्यादा प्यारे अग्निवेश(कांग्रेस और आईएसआई के दलाल) भी 3-4 NGO ही चलाने का ही धंधा करता हैऔर इन सबके NGO को देश कि जनता की गरीबी के नाम पर करोड़ो रुपये का चंदा विदेशों से ही मिलता है. इन दिनों पूरे देश को ईमानदारी और पारदर्शिता का पाठ पढ़ा रही ये टीम अब लोकपाल बिल के दायरे में खुद आने से क्यों डर/भाग रही है.भाई वाह...!!! क्या गज़ब की ईमानदारी है...!!! इन दिनों अन्ना टीम की भक्ति में डूबी भीड़ के पास इस सवाल का कोई जवाब है क्या.....???

जहां तक सवाल है सरकार से सहायता प्राप्त और नहीं प्राप्त NGO का तो बताना चाहूंगा कि, भारत सरकार के Ministry of Home Affairs के Foreigners Division की FCRA Wing के दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2008-09 तक देश में कार्यरत ऐसे NGO's की संख्या 20088 थी, जिन्हें विदेशी सहायता प्राप्त करने की अनुमति भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा चुकी थी.इन्हीं दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2006-07, 2007-08, 2008-09 के दौरान इन NGO's को विदेशी सहायता के रुप में 31473.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुये. इसके अतिरिक्त देश में लगभग 33 लाख NGO's कार्यरत है.इनमें से अधिकांश NGO भ्रष्ट राजनेताओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के परिजनों,परिचितों और उनके दलालों के है. केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त देश के सभी राज्यों की सरकारों द्वारा जन कल्याण हेतु इन NGO's को आर्थिक मदद दी जाती है.एक अनुमान के अनुसार इन NGO's को प्रतिवर्ष न्यूनतम लगभग 50,000.00 करोड़ रुपये  देशी विदेशी सहायता के रुप में प्राप्त होते हैं. इसका सीधा मतलब यह है की पिछले एक दशक में इन NGO's को 5-6 लाख करोड़ की आर्थिक मदद मिली. ताज्जुब की बात यह है की इतनी बड़ी रकम कब.? कहा.? कैसे.? और किस पर.? खर्च कर दी गई.  इसकी कोई जानकारी उस जनता को नहीं दी जाती जिसके कल्याण के लिये, जिसके उत्थान के लिये विदेशी संस्थानों और देश की सरकारों द्वारा इन NGO's को आर्थिक मदद दी जाती है. इसका विवरण केवल भ्रष्ट NGO संचालकों, भ्रष्ट नेताओ, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट बाबुओं, की जेबों तक सिमट कर रह जाता है. भौतिक रूप से इस रकम का इस्तेमाल कहीं नज़र नहीं आता. NGO's को मिलने वाली इतनी बड़ी सहायता राशि की प्राप्ति एवं उसके उपयोग की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नही है. देश के गरीबों, मजबूरों, मजदूरों, शोषितों, दलितों, अनाथ बच्चो के उत्थान के नाम पर विदेशी संस्थानों और  देश में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न सरकारी विभागों से जनता की गाढ़ी कमाई के  दसियों हज़ार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट लेने वाले NGO's की कोई जवाबदेही तय नहीं है. उनके द्वारा जनता के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के भयंकर दुरुपयोग की चौकसी एवं जांच पड़ताल तथा उन्हें कठोर दंड दिए जाने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है. लोकपाल बिल कमेटी में शामिल सिविल सोसायटी के उन सदस्यों ने जो खुद को सबसे बड़ा ईमानदार कहते हैं और जो स्वयम तथा उनके साथ देशभर में India Against Corruption की मुहिम चलाने वाले उनके अधिकांश साथी सहयोगी NGO's भी चलाते है लेकिन उन्होंने आजतक जनता के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के दसियों हज़ार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट लेने वाले NGO's के खिलाफ आश्चार्यजनक रूप से एक शब्द नहीं बोला है, NGO's को लोकपाल बिल के दायरे में लाने की बात तक नहीं की है. 

इसलिए यह आवश्यक है की NGO's को विदेशी संस्थानों और देश में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न सरकारी विभागों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को प्रस्तावित लोकपाल बिल  के दायरे में लाया जाए. (कृपया इस पोस्ट को जितने ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हों उतने ज्यादा लोगों तक पहुंचाइये.)

7 comments:

  1. सब को हड्डी चाहिए !
    जिस टीम में NGO वीर और अग्निवेश जैसे लोग मौजूद हो उससे हमें तो कोई उम्मीद नहीं !!

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  2. कल जो अरविंद केजरीवाल ने कहा आप ने उसे ठीक से ना सुना और ना ही समझा | एक कानून जो सरकारी कर्मचारी पर लागु होता है वही कानून एक निजी कर्मचारी पर लागु नहीं हो सकता है | जिस लोकपाल की बात अभी हो रही है वो केवल और केवल सरकारी और सरकार द्वारा संचालित चीजो पर ही लागु होगा उसमे हम यदि प्राइवेट सेक्टर को भी डाल देंगे तो लोकपाल का काम बहुत ही ज्यादा हो जायेगा और दो कानूनों का घालमेल भी हो जायेगा इसलिए उन्होंने कहा की ये लोकपाल सरकारी कामो के लिए हो और सरकार के बाहर जो लोग भ्रष्टाचार कर रहे है जिनमे एन जो ओ ही नहीं कार्पोरेट वर्ग और वकील भी है तो उन सभी के लिए जो सरकार से बाहर तो है किन्तु भ्रष्टाचार वो भी करते है उनके लिए एक अलग बिल बनाया जाये और उनके भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाया जाये इनमे हर एक एन जी ओ शामिल होगा उनका अपना भी |

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  3. अंशुमाला जी नमस्कार, आपने कहा मेने ठीक से सुना नहीं, मेने ठीक से सुना है देश मजबूत लोकपाल की बात कर रहा है और उसके बाद आप इस तरह की वकालत करे ये उनकी नियत में संदेह पैदा करता है. काम बड जाएगा के कारन आप लोगो को भ्रस्ताचार कंरने की छूट दे ये कहा का कानून है? एक ही विषय पर दो कानून का क्या अर्थ है, ये बड़ी सफाई से मुद्दे से भागने की वकालत है, देश में सभी कानून सबके लिए होते है ये एक अनोखा कानून होगा जो सरकार के लिए अलग और गेर सरकार के लिए अलग. एक ही देश में एक विषय पर दो अलग कानून क्यों.

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  4. खरी खरी जी
    भ्रष्टाचार के लिए सरकारी और गैरसरकारी लोगों पर एक ही कानून लागु नहीं होता है आज भी यही नियम है | सरकारी आदमी सरकार के पैसे हमारे पैसे का घोटाला कर रहा है जबकि निजी कंपनी में काम करने वाला किसी की निजी संपत्ति का नुकसान कर रहा है उसके लिए सरकार कुछ भी नहीं कर सकती है उसके लिए वो व्यक्ति कानून के पास जा सकता है | पर भ्रष्टाचार वहा भी है और सरकार को प्रभावित करने का काम भी किया जाता है इसीलिए उसके लिए अलग कानून बनेगा और वो भी इस लिस्ट में है वहा भी सरकार का ही अडंगा है क्योकि आप जानते है की एन जो ओ के नाम पर वो कितने पैसे इधर उधर करती है और लोग ठगे जाते है | किसी ने भी सरकार को मना नहीं किया है इस बारे में कानून बनाने के लिए वो जब चाहे कानून बना सकती है | इसके आलावा आज के समय में आयकर विभाग भी कार्यवाही
    कर सकती है पर नहीं करती वही भ्रष्टाचार | ये तो आप सरकार से पूछिये की वो क्यों नहीं बना रही है |

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  5. अन्ना हजारे जी का आन्दोलन! फायेदा किसका-किसका ??
    यदि आन्दोलन की टाइमिंग पर विचार किया जाये तो बहुत से तथ्य स्वम ही स्पष्ट हो जायेंगे. सर्वप्रथम आते है की इस आन्दोलन से लाभान्वित कौन कौन होगा
    http://parshuram27.blogspot.com/2011/08/blog-post_20.html

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