Friday, January 20, 2012
Thursday, January 19, 2012
जब भारत माँ हुई लज्जित - कश्मीरी हिंदुओं के निर्वासन की बरसी आज
१९ जनवरी १९९० – ये वही काली तारीख है जब लाखों कश्मीरी हिंदुओं को अपनी
धरती, अपना घर हमेशा के लिए छोड़ कर अपने ही देश में शरणार्थी होना पड़ा |
वे आज भी शरणार्थी हैं | उन्हें वहाँ से भागने के लिए मजबूर करने वाले भी
कहने को भारत के ही नागरिक थे, और आज भी हैं | उन कश्मीरी इस्लामिक
आतंकवादियों को वोट डालने का अधिकार भी है, पर इन हिंदू शरणार्थियों को वो
भी नहीं |
१९९० के आते आते फारूख अब्दुल्ला की सरकार आत्म-समर्पण कर चुकी थी |
हिजबुल मुजाहिदीन ने ४ जनवरी १९९० को प्रेस नोट जारी किया जिसे कश्मीर के
उर्दू समाचारपत्रों आफताब और अल सफा ने छापा | प्रेस नोट में हिंदुओं को
कश्मीर छोड़ कर जाने का आदेश दिया गया था | कश्मीरी हिंदुओं की खुले आम
हत्याएँ शुरू हो गयी | कश्मीर की मस्जिदों के लाउडस्पीकर जो अब तक केवल
अल्लाह-ओ-अकबर के स्वर छेड़ते थे, अब भारत की ही धरती पर हिंदुओं को चीख
चीख कहने लगे कि कश्मीर छोड़ कर चले जाओ और अपनी बहू बेटियाँ हमारे लिए
छोड़ जाओ | "कश्मीर में रहना है तो अल्लाह-अकबर कहना है", "असि गाची
पाकिस्तान, बताओ रोअस ते बतानेव सन" (हमें पाकिस्तान चाहिए, हिंदू
स्त्रियों के साथ, लेकिन पुरुष नहीं"), ये नारे मस्जिदों से लगाये जाने
वाले कुछ नारों में से थे |
दीवारों पर पोस्टर लगे हुए थे कि सभी कश्मीर में इस्लामी वेश भूषा पहनें, सिनेमा पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया |
कश्मीरी हिंदुओं की दुकानें, मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान चिन्हित कर दिए
गए | यहाँ तक कि लोगों की घड़ियों का समय भी भारतीय समय से बदल कर
पाकिस्तानी समय पर करने को उन्हें विवश किया गया | २४ घंटे में कश्मीर छोड़ दो या फिर मारे जाओ – काफिरों को क़त्ल करो का सन्देश कश्मीर में गूँज रहा था |
इस्लामिक दमन का एक वीभत्स चेहरा जिसे भारत सदियों तक झेलने के बाद भी
मिल-जुल कर रहने के लिए भुला चुका था, वो एक बार फिर अपने सामने था |
आज कश्मीर घाटी में हिंदू नहीं हैं | उनके शरणार्थी शिविर जम्मू और दिल्ली में आज भी हैं | २२ साल से वे वहाँ जीने को विवश हैं | कश्मीरी पंडितों की संख्या ३ लाख से ७ लाख के बीच मानी जाती है, जो भागने पर विवश हुए
| एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो गयी | कभी धनवान रहे ये हिंदू आज सामान्य
आवश्यकताओं के मोहताज हैं | उनके मन में आज भी उस दिन की प्रतीक्षा है जब
वे अपनी धरती पर वापस जा पाएंगे | उन्हें भगाने वाले गिलानी जैसे लोग आज भी
जब चाहे दिल्ली आके कश्मीर पर भाषण देकर जाते हैं और उनके साथ अरूंधती रॉय
जैसे भारत के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवी शान से बैठते हैं |
कश्यप ऋषि की धरती, भगवान शंकर की भूमि कश्मीर जहाँ कभी पांडवों की २८
पीढ़ियों ने राज्य किया था, वो कश्मीर जिसे आज भी भारत माँ का मुकुट कहा
जाता है, वहाँ भारत के झंडा लेकर जाने पर सांसदों को पुलिस पकड़ लेती है और
आम लोगों पर डंडे बरसाती है | ५०० साल पहले तक भी यही कश्मीर अपनी शिक्षा
के लिए जाना जाता था | औरंगजेब का बड़ा भाई दारा शिकोह कश्मीर
विश्वविद्यालय में संस्कृत पढ़ने गया था | बाद में उसे औरंगजेब ने इस्लाम
से निष्कासित करके भरे दरबार में उसे क़त्ल किया था | भारतीय संस्कृति के
अभिन्न अंग और प्रतिनिधि रहे कश्मीर को आज अपना कहने में भी सेना की सहायता
लेनी पड़ती है | “हिंदू घटा तो भारत बंटा” के 'तर्क’ की कोई काट उपलब्ध
नहीं है | कश्मीर उसी का एक उदाहरण मात्र है |
मुस्लिम वोटों की भूखी तथाकथित सेकुलर पार्टियों और हिंदू संगठनों को पानी
पी पी कर कोसने वाले मिशनरी स्कूलों से निकले अंग्रेजीदां पत्रकारों और
समाचार चैनलों को उनकी याद भी नहीं आती | गुजरात दंगों में मरे
साढ़े सात सौ मुस्लिमों के लिए जीनोसाईड जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले
सेकुलर चिंतकों को अल्लाह के नाम पर क़त्ल किए गए दसियों हज़ार कश्मीरी
हिंदुओं का ध्यान स्वप्न में भी नहीं आता | सरकार कहती है कि कश्मीरी हिंदू
"स्वेच्छा से" कश्मीर छोड़ कर भागे | इस घटना को जनस्मृति से
विस्मृत होने देने का षड़यंत्र भी रचा गया है | आज की पीढ़ी में कितने लोग
उन विस्थापितों के दुःख को जानते हैं जो आज भी विस्थापित हैं | भोगने वाले
भोग रहे हैं | जो जानते हैं, दुःख से उनकी छाती फटती है, और आँखें याद करके
आंसुओं के समंदर में डूब जाती हैं और सर लज्जा से झुक जाता है | रामायण की
देवी सीता को शरण देने वाली भारत की धरती से उसके अपने पुत्रों को भागना
पड़ा | कवि हरि ओम पवार ने इस दशा का वर्णन करते हुए जो लिखा, वही प्रत्येक
जानकार की मनोदशा का प्रतिबिम्ब है - "मन करता है फूल चढा दूँ लोकतंत्र की
अर्थी पर, भारत के बेटे शरणार्थी हो गए अपनी धरती पर" |
(http://hindi.ibtl.in/news/exclusive/1853/article.ibtl के माध्यम से)
Tuesday, December 27, 2011
"अन्ना का अनशन"----एक सुपरहिट ड्रामे की श्रंखला
![]() |
| (मिलिए आतंकवादी यासीन मालिक और अन्ना जी से एक ही रजाई में ) |
मुख्य पात्र:-
दिग्विजय सिंह
अन्ना हजारे
बाबा रामदेव जी
भाई राजीव दीक्षित जी
विदेशी कंपनियों के भारतीय दलाल
इस
नाटक की शुरुआत तब होती है जब स्वदेशी आन्दोलन के प्रखर प्रवक्ता राजीव दीक्षित जी भारत स्वाभिमान यात्रा के तहत गाँव गाँव जाकर लोगो को स्वदेशी और
अपनी संस्कृति के बारे में लोगो को जागरूक कर रहे थे. विदेशी
कंपनियों की लूट, कोल्ड ड्रिंक के रूप में ज़हर, पाश्चात्य दर्शन की और
हमारा झुकाव और उसके दुष्परिणाम, हमारी आज़ादी का दुष्प्रचार जैसे कई
विषयों पर उनके तर्कपूर्ण व्याख्यानों से विदेशी कंपनियों के दलाल और कांग्रेसी सरकार डर गयी थी
उसके बाद स्वामी रामदेव जी महाराज ने भारत स्वाभिमान यात्रा करने का संकल्प लिया
हर तहसील जिले में जाकर वो अपना गला फाड़कर लोगो को समझाते की किस तरह ये कांग्रेस और विदेशी कंपनिया हमें लूट रही है लोग जागरूक होने लगे थे उन्हें पता चल गया था की इन कांग्रेस्सियो ने ५० सालो से देश को लूटकर स्विस बैंक में जमा कर रखा है |
बाबा योग के साथ साथ देशभक्ति की भी शिक्षा देने लगे थे ये कांग्रेसी सरकार को बर्दाश्त नहीं हो रहा था| इसी कारण से कभी बाबा का गुणगान करने वाली मीडिया और कांग्रेस ने बाबा की छवि ख़राब करने का प्रयास शुरू कर दिया था
दिनांक :- १४ नवम्बर २०१०
स्थान :- जंतर मंतर, दिल्ली
बाबा
के मंच पर अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी, अन्ना हजारे, प्रसिद्ध
वकील रामजेठमलानी जी और भ्रष्टाचार के सबसे बड़े दुश्मन डॉक्टर सुब्रमनिं स्वामी जी के साथ मौजूद काफी गणमान्य लोग कालेधन को वापस लाने
की मुहीम में बाबा का साथ देने की अपील करते है तब कोई भी अन्ना और अरविन्द को पहचानता तक नहीं था बाबा उनका देश से परिचय करवाते है
दिनांक :- २७ फरबरी 2011
स्थान:- रामलीला मैदान, दिल्ली
बाबा के मंच पर मौजूद सभी लोग (with अन्ना) काला धन वापस लाने के लिए एक देशव्यापी आन्दोलन का आवाहन करते है| चूँकि
बाबा की हर रैली किसी न किसी देशभक्त के जन्म दिवस या शहीद दिवस से
सम्बंधित होती थी इसलिए २७ फरबरी (चन्द्र शेखर आज़ाद का शहीद दिवस) के बाद
बाबा ने ४ जून(महाराणा प्रताप का जन्म दिवस) को काले धन को वापस लाने की
मांग को लेकर आमरण अनशन करने की घोषणा की
कांग्रेस को बाबा को मिलता हुआ अपार जनसमर्थन देखकर डर लगने लगा था | उसे अपना असितत्व खतरे में दिखाई दिया तो उसने एक गेम प्लान किया--- बाबा और कालेधन की मांग को ब्रह्माण्ड में विलीन करवाने का षड्यंत्र रचा और उसी षड्यंत्र के तहेत कांग्रेस और अन्ना का मिलाजुला खेल शुरू हुआ |
दिनांक :- 5 अप्रैल 2011
स्थान :- जंतर मंतर
जनता के सामने एक नया हीरो अवतरित हुआ और एक नया मुद्दा, उस हीरो को अनशन पर बिठाया गया और इसका पूरा खर्चा उठाया कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल ने कांग्रेस के टुकडो पर पलने वाली मीडिया ने उसका खूब जोर शोर से प्रचार किया की वो एक ही दिन में जीरो से हीरो बन गया
दिनांक :- ४ जून 2011
स्थान :- रामलीला मैदान
२१ घंटे में ही कांग्रेसी साम्राज्य की नीव हिल गयी सरकार अपनी सभी साजिशो को असफल होता देखकर कांग्रेस ने ओरते बुजुर्ग और छोटे छोटे बच्चो पर लाठी चार्ज करवा दिया, जलियावाला बाग़ याद आ गया लोगो को बहिन राजबाला की हत्या भी की कांग्रेस ने, मीडिया ने बाबा के खिलाफ दुष्प्रचार करने में कोई कमी नहीं छोड़ी
इसी बीच ९ जून से १६ जून तक सोनिया और राहुल स्वीजरलैंड में अपना कला धन ठिकाने लगा आये बाद में जब स्विस बैंक के सीईओ ने ये रकम बताई तो वो ४०० लाख करोड से कम होकर २८० लाख करोड बची
अन्ना ने दिल्ली पुलिस की कायवाही के विरुद्ध एक दिन का सांकेतिक अनशन (ड्रामा) भी किया
दिनांक :-१६ अगस्त २०११
स्थान :- रामलीला मैदान
अन्ना का तीसरा अनशन शुरू अन्ना को ४ जून के EMOTION का फायदा मिला और लोग ड्रामा देखने जुटे इसी
बीच सोनिया किसी गुप्त रोग का इलाज कराने अमेरिका चली गयी और सुनने में
ये भी आया था की उन्होंने BLACK MONEY को GOLD में CONVERT कर लिया
अन्ना
ने आन्दोलन के सफल बनाने केलिए सबका नाम लिया लेकिन बाबा और उस शहीद को
भुला दिया जिसने आन्दोलन में अपनी जान दे दी क्योंकी वो बाबा रामदेव जी के भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से
जुड़ा था |
अन्ना ने ये कहकर अनशन तोड़ दिया की सरकार ने हमारी मागे मान ली सभी अंधभक्तो ने खूब एन्जॉय किया जबकी सचाई ये है कि, अन्ना और कांग्रेस दोनों ने मिलकर देश को उल्लू बनाया| पड़े रात को दिन कैसे कह दूं.....?
अग्निवेश ने अमरनाथ यात्रा को ढोंग कहा तो अन्ना शांत |
अग्निवेश ने कश्मीर के बिना भारत के नक़्शे के चित्र का अनावरण किया अन्ना फिर भी शांत |
अग्निवेश ने अन्ना को पागल हाथी कहा तो टीम से निकल दिया गया |
प्रशांत भूषण ने कश्मीर लोड़ने की बात कही और मेधा पाटेकर और संदीप पाण्डेय ने सेना के खिलाफ रैली निकाली | अन्ना जी मौन व्रत पर निकल पड़े, क्यों?
कुमार विश्वास ने भगवन शिव और बाबा के खिलाफ अशोभनीय व्यंग किया "अकबर की तरह गए थे जोधा की तरह आये" यही बोला था न बाबा के लिए कुमार साहब ने | अन्ना जी मौन
संदीप पाण्डेय ने राष्ट्भाक्त संगटन आर एस एस की तुलना आतंकी संगठन से की, अन्ना जी मौन
किरण बेदी भ्रष्टाचार में लिप्त पायी जाती है और बाबा राम देव के लिए बोलती है "Baba Ramdev has a hidden agenda ."
११ दिसम्बर २०११ को भी एक अनशन ड्रामा किया गया और आज भी एक ड्रामा स्टार्ट होने वाला है|
ये अन्ना का जन लोकपाल बिल के लिए चौथा अनशन होगा लेकिन क्या हासिल हुआ पिछले तीन नाटको में
जहा
से हमने चलना शुरू किया था वही खड़े है और अगर गहराई से सोचे तो और पीछे
ही चले गए है अन्ना बार बार ड्रामा करके लोगो को उलझाये रखना चाहते है जबकी नारा होता है अबकी आर पार ये आर पार कब होगी शायद अन्ना भी नहीं जानते पर ड्रामा तो करना ही है क्योंकी गांधीवादी पार्टी यही चाहती है ताकि सबका ध्यान BLACK MONEY से हटाया जा सके
कुछ समय बाद कांग्रेस जन लोक पाल बिल पारित करा देगी .. इंतजार का फल मीठा होता है लोग अन्ना को भगवन की तरह पूजने लगेगे जो अन्ना कहेगे वही लोग करेगे चूंकि बिल कांग्रेस ने पारित करवाया इसलिए अन्ना कहेगे हम कांग्रेस सरकार के बहुत आभारी है और हमे सारे गिले शिकवे भूल जाना चाहिए चुकी
अन्ना ये भी मानते है की भ्रष्टाचार में कांग्रेस के पास बेच्लोर डिग्री है
तो बीजेपी के पास पीएचडी इसलिए अगर २०१४ के आम चुनावों में अन्ना कांग्रेस
के पक्ष में वोटिंग करवाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए
जो सहमत है उनके लिए ये रियल स्टोरी है और जो असहमत है उनके लिए सिर्फ स्टोरी
Saturday, December 17, 2011
पाकिस्तान से आये हिन्दुओं पर टूटा यूपी पुलिस का कहर
माया का गुण्डाराजः
पाकिस्तान से आये हुये कुल 151 हिन्दुओं को दिल्ली पुलिस को सूचना देकर गाजियाबाद के एक मंदिर में ले जाकर पुर्नस्थापित किया जा रहा था। इसके लिये उ0प्र0 के पुलिस को पहले से ही सूचित भी कर दिया गया था। मगर अर्धरात्रि में मायावती के मुगलिया फरमान पर यू0पी0 पुलिस ने उन पिछड़े, दलित हिन्दुओं पर जो अति बर्बर, अति जघन्यतम कार्रवायी की उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है। इतना ही नही आधी रात को पुलिस उन सब पर निर्दयतापूर्वक टूट पड़ी, उनके सारे मोबाइल फोन आदि छीन लिये और उन्हें एक गाड़ी में भरकर अक्षरधाम नेशनल हाइवे पर कड़कड़ाती सर्दी में छोड़कर चले गये। इन पुलिस अधिकारियों को उनके महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों पर जरा भी दया नही आयी कि ये खुले आसमान में कैसे रात गुजारेंगे।
ज्ञात रहे कि ये वही पाकिस्तानी हिन्दू थे जो पिछले कयी महीने से दिल्ली के मजनूटीले पर शरण लिये हुये थे। ये पाकिस्तान से वीसा पर हिन्दू तीर्थस्थलों पर भ्रमण के लिये आये हुये थे और पाकिस्तान नही जाना चाहते थे। क्योंकि पाकिस्तान में इस्लामी मुस्लिम गुण्डे आये दिन इनसे जजिया कर मांगा करते थे, इनके मां-बहन और बेटियों के अस्मत से भी खिलवाड़ करते थे। इनके कयी रिश्तेदारों को तालिबानी गुण्डों ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था।
अर्ध रात्रि में इन पाकिस्तानी हिन्दुओं के साथ अमानवीय कार्रवायी पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ0 संतोष राय ने उ0प्र0 सरकार के गृहसचिव कुंवर फतेह बहादुर सिंह से बातचीत की तो उन्होंने आधे घंटे का समय मांगा और मदद का आश्वासन दिया। मगर कुछ समय बाद उन्होंने पाकिस्तानी हिन्दुओं के प्रति अपनी संवेदना जताते हुये कहा कि हमें मैडम माया ने डांटा कि विधानसभा का चुनाव है, हम इस वक्त कुछ भी मदद नही कर सकते, हम इनकी चाहकर भी मदद न करने पर मजबूर हैं।
ये पाकिस्तानी हिन्दू पाकिस्तान से लूटपिट कर, वहां के बर्बर अत्याचर से मुक्ति की आस से यहां आये थे कि उनकी मातृभूमि भारत में उन्हें शरण मिलेगी मगर इनके साथ मैडम मायावती ने जो अमानवीय, जघन्यतम व्यवहार कराया वो कभी नही भूलाया जा सकता। ज्ञात रहे कि ये पाकिस्तानी हिन्दू दलित और पिछड़े समुदाय से हैं। हिन्दू महासभा ने इस घटना की तीव्र भर्त्सना करते हुये कहा कि मायावती दलितों और पिछड़ों की घोर विरोधी है। गाजियाबाद के एसपी सिटी ने भी कहा कि इन पाकिस्तानी हिन्दुओं की मदद तो हम भी करना चाहते हैं मगर मुख्यमंत्री मायावती के आदेश के आगे हम कुछ नही कर सकते। यही नही गाजियाबाद पुलिस ने हिन्दू महासभा के नेताओं को धमकाते हुये कहा कि यदि इन हिन्दुओं को यहां से भगाने में आपसब लोगों ने व्यवधान डाला तो आप सबके उपर मुकदमा चलाया जायेगा।
एक उच्चाधिकारी ने अपना नाम छिपाते हुये कहा कि यदि ये मुस्लिम मजहब के होते तो माया हो या मुलायम या मैडम सोनिया सबके आंखों के ये तारे हो जाते। इन्हें यहां बसाया भी जाता और यहां की नागरिकता भी प्रदान की जाती जैसे कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेशी मुसलमानों के साथ किया था।
Monday, December 12, 2011
आकलन स्वयं विवेक से
सोचिये अगर देश की बागडोर राहुल गाँधी ,दिग्विजय सिंह ,कपिल सिब्बल , उमर अब्दुल्ला , अन्ना हजारे या बाबा रामदेव जी के हाथ में दी जाए तो स्थिति क्या होगी :-
राहुल गाँधी :-
१-सभी १०वि पास/फेल युवकों को सनातक की डिग्री बांटी जायेगी साथ में ही विदेश की नागरिकता भी दी जायेगी |
२-समलैंगिगता को सरकारी और सामाजिक मान्यता दी जायेगी |
३-राष्ट्रीय सलाहकार केवल अंग्रेजो के गुलाम राज घराने से आये लोग होंगे |
४-भारत में गरीबो को कांग्रेसी नेताओं के रहने और खाने का इंतजाम हर हाल में करना होगा |
५-राहुल गाँधी से सामान्य ज्ञान और राजनीति से सम्बंधित सवाल पूछने की सख्त मनाही होगी चाहे सवाल मिडिया के हो या आम जनता के ?||

दिग्विजय सिंह :-
१- आरएसएस पर प्रतिबन्ध लगेगा |
२-बाबा रामदेव ,अन्ना हजारे जेल में |
३-सारे साधू संतो को भगवा पहनने पर सजा का प्रवाधान |
४-भारत में सबसे अधिक बिक्री " बेस बैट " की हुआ करेगी |
५-सरकार के खिलाफ बोलने वालो को सड़क पर ही तत्काल सज़ा मिलेगी ||

कपिल सिब्बल :-
१-केवल कांग्रेस के लोग ही अपनी बात कह पायेगे ,विपक्ष को खत्म/कमजोर कर दिया जाएगा |
२-सोशल साईट पर सोनिया ,राहुल और कांग्रेस के गुण गाने वाले लोग ही आकाउंट खोलने और चलने के लिए स्वतंत्र होंगे विरोध में बोलने वालो को जेल नसीब होगी |
३-लाल गुलाब बाटने वाले लोगो को ढूंढ़ ढूंढ़ कर जेल में डाला जाएगा |
४-कपिल सिब्बल के चुनावी क्षेत्र में और कोई चुनाव नहीं लडेगा |
५-कपिल सिब्बल कभी भी कंही भी किसी पर भी प्रतिबन्ध लगाने के लिए स्वतंत्र होंगे |

उमर अब्दुल्ला :-
१-मीडिया में केवल उमर अब्दुल्ला के ही ब्यान आया करेगे |
२-खबरिया चैनल्स में केवल लडकिया काम करेगी और कम से कम कपडे पहन कर आने वाली लड़कियों को उमर अब्दुल्ला के साथ रहना होगा |
३-पकिस्तान को जम्मू कश्मीर दे दिया जाएगा और बाप फारुख अब्दुल्ला कश्मीर के वजीरे आज़म बना दिए जायेगे |
४-काफ़िरो को यानी हिन्दुओं को भारत में उसी तरहा खत्म किया जायेगा जैसे पकिस्तान और बंगलादेश से किया गया है |
५-सेना में केवल इस्लामिक जेहादियों को भर्ती किया जाएगा |

अन्ना हजारे :-
१-पाकिस्तानी आतंकी जब भारत पर हमला करेगे और पकडे जायेगे तो अन्ना गैंग उनके लिए न्याय की दूकान चलाया करेगे |
२-जब कभी भी संसद में विपक्ष शोर मचाएगा या अपनी कोई मांग उठाएगा तब अन्ना अपने स्वस्थ का हवाला देकर मौन पर चले जायेगे |
३-जब कभी भी कोई अन्ना गैंग के खिलाफ कुछ करेगा उसको खम्बे से बाँध कर पीता जाएगा |
४-चूँकि अन्ना के प्रधानमंत्री बनते ही जनलोकपाल बिल पास हो कर काम करने लगेगा तो अन्ना सारे सरकारी अनुदान अपने और अपने गैंग के एजीओ को दिया जाएगा क्योकि एजीओ को लोकपाल के दायरे में लाया नहीं जाएगा तो उन पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्यवाही होगी नहीं ,,, हो गयी तेरी बल्ले बल्ले ....
५-जब कभी भी विपक्ष काम रोको प्रस्ताव लाएगा अन्ना संसद के बहार अनशन पर बैठ जायेगे |

बाबा रामदेव जी :-
१-काला धन वापिस आयेगा देश के विकास में लगेगा और भारत पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो कर सोने की चिड़िया कहलाया जाने लगेगा |
२-सारे भ्रष्ट और कामचोर नेता ,अफसरों पर अंकुश लगेगा /सज़ा मिलेगी ||
३-उन सभी विदेशी कम्पनियों पर प्रतिबन्ध लगेगा जो पेप्सी ,कोक,जंक फ़ूड और अन्य स्वस्थ के लिए हानिकारक खाने पीने की वस्तुए बेचते है |
४-प्रत्येक भारतीय को योग और चरित्रवान बनने के गुण सिखाये जायेगे ,भारतीय सभ्यता और संस्कृति को योग और आयुर्वेद को महत्त्व दिया जाएगा |
५ -स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन करने उपयोग करने के लिए जनता को प्रेरित किया जाएगा जिससे अधिक व्यय रुके ,भारत का धन अधिक से अधिक भारत में ही रहे ,भारत का व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत और शारीरिक रूप से प्रबल बनेगा |
६-देश में सामान कानून व्यवस्था और छोटे बड़े का भेद मिटाने के प्रायस किये जायेगे |
७-भारत पुनः अपनी खोयी हुयी साख और जनमानस में उच्च आचरण प्राप्त करेगा ||
८-पाश्चात्य संस्कृति के तीव्रता से बढती महामारी का इलाज़ संभव हो पायेगा |
९-गुरुकुल परम्परा और मान पुनः स्थापित हो पायेगा |
१०-शूरवीर क्रान्तिकारियों के सपनो का भारत स्थापित हो पायेगा जिसके लिए माँ भारती के लाखो लालो ने अपने प्राणों को अर्पित किया था ||
हालाकि मैं इन सभी को प्रधानमंत्री जैसे पद पर कभी भी नहीं देखना चाहूंगा किन्तु वर्तमान में इनके द्वारा किये जा रहे कार्यों के आकलन के लिए प्रधानमंत्री बनाने की बात को ध्यान में रखते हुए कुछ बिंदु सामने लाया हूँ ||
जय जय माँ भारती , जय जय सियाराम ||
जीत शर्मा " मानव "
Friday, December 9, 2011
अभियक्ति की स्वत्रन्त्रता पर सरकार के तानाशाही खिलाफ अनिशचितकालिन अनशन की इज़ाज़त रद्द और गिरफ्तार
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| (भगत सिंह क्रांति सेना के अध्यक्ष तजिंदर पाल सिंह बग्गा का फाइल चित्र) |
देश की सरकार द्वारा जनता की आवाज को दबाने के लिए तुगलकी और तानाशाही फैसले किये जा रहे है. पहले से ही भ्रस्टाचार और महंगाई से परेशान जनता पर इस तरह के नये नये फरमान सुनाना लगता है सरकार के लिए एक रोजाना कार्य बन गया है.लोगो के आवाज़ उठाने के तरीको और स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति पर लगाम लगाने की सरकार द्वारा कोशिशे लगातार चल रही है. और लोग अगर उसका संवेधानिक तरीको से विरोध करते है तो उन्हें गिरफ्तार किया जाता है और उन पर मुकदमे दर्ज किये जाते है जो की भारतीय सविधान की मर्यादा को तार तार करने का प्रयास है. और हम इसका खंडन,निंदा और कड़ी भर्त्सना करते है.
लगभग 3-4 दिन पहले मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल जी द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और ट्विटर पर अंकुश लगाने का प्रयास करना इस तानाशाही रविये का एक नमूना है. और जनता में इस चीज का भारी रोष,आक्रोश और गुस्सा है.और इस आक्रोश को शातिपूर्वक प्रगट करने जब भगत सिंह क्रांति सेना के कार्यकर्त्ता कपिल सिब्बल जी के घर गुलाब और गेट वेल सून के कार्ड लेकर गये तो उन्हें बलपूर्वक गिरफ्तार किया गया और उनके ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया. शांतिपूर्वक विरोध करने के प्रयास को सरकार द्वारा इस प्रकार कुचलना लोकतंत्र की हत्या करने के सामान है और देश को आघोषित आपातकाल की याद दिला रहा है. भगत सिंह क्रांति सेना पर ही नहीं उसके अलावा श्री अन्ना हजारे जी और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के 100 से ज्यादा लोगो पर भी इसी प्रकार से तानाशाही तरीके से केस दर्ज किये गये है. अभीव्यक्ती की स्वतंत्रता को कुचलने की सरकार के इस प्रयास का भगत सिंह क्रांतिकारी सेना विरोध करने के लिए 9 दिसम्बर प्रात: 11 बजे से अनिशित्कालिन अनशन पर बैठ रहे थी. जिसकी कानूनन इज़ाज़त ली गयी थी पर बिना किसी पूर्व सूचना के सरकार के दबाब में इज़ाज़त रद्द कर दी गयी और भगत सिंह क्रांति सेना के कर्येकर्ताओ को गिरफ्तार किया गया . भगत सिंह क्रांति सेना की सरकार से मांगे है.
1- सरकार द्वारा लोगो के मोबाईल पर लगाये गये एसएमएस सीमा के प्रतिबन्ध को वापस लिया जाये.कोई आपने निजी मोबाईल से अपने किसी परिचित को एक संदेश भेजे यां एक हजार इसकी सीमा सरकार नही तय कर सकती.इस प्रकार का फैसला लोगो की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना है.
2-सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और ट्विटर ब्लॉग उपभोग्तायो पर कपिल सिब्बल द्वारा अंकुश लगाने की मांग करना भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना है.हम मांग करते है कि सरकार कपिल सिब्बल के इस ब्यान को ख़ारिज करे और इस प्रकार के किसी भी फैसले को तुरंत वापिस ले
3- शांतिपूर्वक विरोध करने के प्रयास में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के 100 से ज्यादा लोगो पर जो मुकदमे दर्ज हुए है उन्हें वापिस लिया जाये.
4-कपिल सिब्बल के घर गुलाब का फूल और गेट वेल सून के कार्ड देने के आरोप में मेरे और जो भगत सिंह क्रांति सेना के बाकी लोगो पर मुकदमा दर्ज किया गया उन्हें वापिस लिया जाए.क्योंकि हमारा मानना है की हमने फूल देकर कोई कानून का उल्लंघन नही किया है और हमारे पर दर्ज किया गया मुकदमा केवल सरकार द्वारा जनता की आवाज़ को कुचलने का एक प्रयास है.
लगभग 3-4 दिन पहले मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल जी द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और ट्विटर पर अंकुश लगाने का प्रयास करना इस तानाशाही रविये का एक नमूना है. और जनता में इस चीज का भारी रोष,आक्रोश और गुस्सा है.और इस आक्रोश को शातिपूर्वक प्रगट करने जब भगत सिंह क्रांति सेना के कार्यकर्त्ता कपिल सिब्बल जी के घर गुलाब और गेट वेल सून के कार्ड लेकर गये तो उन्हें बलपूर्वक गिरफ्तार किया गया और उनके ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया. शांतिपूर्वक विरोध करने के प्रयास को सरकार द्वारा इस प्रकार कुचलना लोकतंत्र की हत्या करने के सामान है और देश को आघोषित आपातकाल की याद दिला रहा है. भगत सिंह क्रांति सेना पर ही नहीं उसके अलावा श्री अन्ना हजारे जी और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के 100 से ज्यादा लोगो पर भी इसी प्रकार से तानाशाही तरीके से केस दर्ज किये गये है. अभीव्यक्ती की स्वतंत्रता को कुचलने की सरकार के इस प्रयास का भगत सिंह क्रांतिकारी सेना विरोध करने के लिए 9 दिसम्बर प्रात: 11 बजे से अनिशित्कालिन अनशन पर बैठ रहे थी. जिसकी कानूनन इज़ाज़त ली गयी थी पर बिना किसी पूर्व सूचना के सरकार के दबाब में इज़ाज़त रद्द कर दी गयी और भगत सिंह क्रांति सेना के कर्येकर्ताओ को गिरफ्तार किया गया . भगत सिंह क्रांति सेना की सरकार से मांगे है.
1- सरकार द्वारा लोगो के मोबाईल पर लगाये गये एसएमएस सीमा के प्रतिबन्ध को वापस लिया जाये.कोई आपने निजी मोबाईल से अपने किसी परिचित को एक संदेश भेजे यां एक हजार इसकी सीमा सरकार नही तय कर सकती.इस प्रकार का फैसला लोगो की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना है.
2-सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और ट्विटर ब्लॉग उपभोग्तायो पर कपिल सिब्बल द्वारा अंकुश लगाने की मांग करना भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना है.हम मांग करते है कि सरकार कपिल सिब्बल के इस ब्यान को ख़ारिज करे और इस प्रकार के किसी भी फैसले को तुरंत वापिस ले
3- शांतिपूर्वक विरोध करने के प्रयास में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के 100 से ज्यादा लोगो पर जो मुकदमे दर्ज हुए है उन्हें वापिस लिया जाये.
4-कपिल सिब्बल के घर गुलाब का फूल और गेट वेल सून के कार्ड देने के आरोप में मेरे और जो भगत सिंह क्रांति सेना के बाकी लोगो पर मुकदमा दर्ज किया गया उन्हें वापिस लिया जाए.क्योंकि हमारा मानना है की हमने फूल देकर कोई कानून का उल्लंघन नही किया है और हमारे पर दर्ज किया गया मुकदमा केवल सरकार द्वारा जनता की आवाज़ को कुचलने का एक प्रयास है.
Wednesday, December 7, 2011
सोशल मीडिया पर ‘निगरानी’ का विरोध, सिब्बल के घर के बाहर प्रदर्शन
नई दिल्ली. सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट की निगरानी करने और इन्हें हटाए जाने के उपाय ढूंढने के सरकार के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर फेसबुक, गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट को चेतावनी दी थी कि वो यूजर्स के कंटेंट की निगरानी करें। सिब्बल के ऐलान के बाद बुधवार को उनके घर के बाहर प्रदर्शन हुए।


कपिल सिब्बल के दिमागी हालात जल्दी ठीक हो जाएँ इसके लिए तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की अगुवाई वाली भगत सिंह क्रांति सेना के सदस्यों ने सिब्बल के घर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ‘गेट वेल सून कपिल मामू’ के नारे लगा रहे थे। उन्हें गुलाब के फूल भेंट करने के लिए जाते हुए तजिंदर पाल सिंह बग्गा , विष्णु गुप्ता , शिव कुमार राघव और आशीष सिंह के साथ कई सारे क्रांतिकारीयो को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है सभी को चाणक्यपुरी थाने में ले जाया गया है और उन पर धारा 97 डी के तहेत केस बनाया गया बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया कल पटियाला कोर्ट में सुनवाई है| गौरतलब है कि बग्गा वही शख्स है जिसने कश्मीर पर बयान को लेकर टीम अन्ना के सदस्य और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की पिटाई कर दी थी।
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